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लेखनी कहानी -12-May-2024

सारी दुनिया मतलबी हैं शायद यही लाइन पढ़ कर आप यहां आये है,,,,,, क्योंकि यह बात आप भी बहुत अच्छे से जानते हैं की सारी दुनिया मतलबी है,,,,,पर सच कहूं तो यह आपकी और मेरी गलतफहमी है,,,,दुनिया मतलबी नहीं है,,,मतलबी,,,इंसान की जरूरत है,,,जिसे पूरा करने के लिए पति-पत्नी को धोखा देता है,,,पत्नी-पति को धोखा देती है,,,बच्चे,,,माँ-बाप को धोखा देते हैं, माँ-बाप,,,बच्चों को धोखा देते हैं,,, जब इंसान इन सबसे महान रिश्तो को धोखा देने से नहीं चुकता तो फिर,,,प्यार,,,दोस्ती जैसे छोटे-मोटे रिश्तो की तो यहां कोई औकात ही नहीं है,,,

मेरा नाम लव जोशी है,,,मैं,,,आज 18 साल का हो गया हूं,,,मैं उन लड़कों की तरह नहीं हूं .,,,जो अपने जन्मदिन पर बेफिक्र होकर,,,जश्न मनाते हैं,,,दोस्तों के साथ मौज मस्ती करके,,,पार्टीया मनाते हैं,,, मैं थोड़ा डिफरेंट हूं, ,,क्योंकि यह दुनिया जो भी करती है,,,मुझे गलत लगता है,,,जैसे आज मेरी जिंदगी का 1 साल हो कम हो गया है,,, मुझे इसमें खुशी मनाने जैसी कोई बात नजर नहीं आती,,,, मुझे लगता है जिंदगी इंजॉय करने के लिए नहीं है,,,,इंजॉय करना तो दुनिया के उन,,,,बेफिक्र लोगों का काम है,,,जो बेहोश होकर,,,अपना जीवन जी रहे हैं,,,,,

आपको मेरी बात थोड़ी अजीब लग सकती है पर जब आप,,,,मेरी कहानी में,,,,मेरे सा,,,इस जर्नी को पूरा कर लोगे तो समझ जाओगे,,,,मैं सच कह रहा हूं,,,,बस आपको थोड़ा सा मुझे समझने की जरूरत है,,,अब बिना समय गवाएं,,,अपनी जर्नी शुरू करते हैं, ,,, क्योंकि हम सब का समय बहुत खास है,,, क्या आपको पता है,,,,हम सभी,,,हमारे समय में उसी जगह पर होते हैं,,,जहां हमें होना चाहिए,,यह बात आप अभी 1 मिनट बाद समझ जाएंगे

मेरे अनुसार इस जगत में अस्तित्व का कारण इच्छाएं होती है,,,इच्छाओं का कारण,,,हमारी पांच इंद्रिया होती है,,,जैसे,,,,आंख,,,नाक,,कान,,,जीभ और शारीरिक स्पर्श,,,,,18 साल की खूबसूरत लड़की और 99 साल की बूढी औरत को कैसे देखना है,,,आंखे जानती है,,,,फूलों की खुशबू और मल की दुर्गंध को नाक जानती है,,,,,,किसने तारीफ की है और किसने गाली दी है,,,कान को सब पता है,,,,खट्टा,,,मीठा,,,तीखा,,,फीका क्या होता है,,,जीभ सब जानती है,,,बच्चों को कैसे छुना है,,,दोस्तों,,,गर्लफ्रेंड,,,माता-पिता,,,,बहन ओर पत्नी को कैसे छूना हैं,,,,,छूने वाला सब जानता है,,,

हमें,,, उन सभी लोगों से कैसा व्यवहार और बर्ताव करना है,,,जिन्हें हम जानते हैं,,,यह हम सभी बहुत अच्छे से जानते और समझते हैं,,,मैं भी यह सब कुछ बहुत अच्छे से जानता हूं,,,मेरी जिंदगी भी बिल्कुल आपकी तरह है,,,मेरी जिंदगी में भी वह सारे रिश्ते-नाते हैं,,,जिन्हें हम माता-पिता,,,भाई-बहन,,,दोस्त और गर्लफ्रेंड के नामो से जानते हैं,,,,

मैं इस वक्त,,,नदी किनारे खड़ा होकर,,,बहते हुए पानी में  अपने,,,बहते हुए जीवन को देख रहा हूं पर हमारे जो रिश्ते, ,,बंधन होते हैं,,,उन्हें हमारा बहना और उड़ना अच्छा नहीं लगता है,,,,इसीलिए पापा का फोन आ रहा है,,,वह जल्दी घर बुलाना चाहते हैं,,,दोस्तों के फोन आ रहे हैं,,,वह मुझसे आज,,,बर्थडे पार्टी लेना चाहते हैं,,,गर्लफ्रेंड का भी फोन आ रहा है,,,वह मुझे, बर्थडे विश करके,,,कोई गिफ्ट देना चाहती है,,,

मेरे बर्थडे को लेकर,,,यह सभी लोग बहुत एक्साइटेड है और एक में हूं,,,जिसे अपने बर्थडे में जरा सा भी इंटरेस्ट नहीं है,,,क्योंकि मैं,,,थोड़ा अलग हूं,,,मैं गंभीर मुद्रा में खड़ा होकर,,,नदी के बहते पानी को देख रहा था,,,तभी मेरा फोन बजा,,, इस रिंगटोन के साथ

रूठी तकदीरें तो क्या टूटी शमशीरें तो क्या टूटी शमशीरें से ही हो..... कर हर मैदान फ़तेह कर हर मैदान फ़तेह कर हर मैदान फ़तेह रे बंदेया हर मैदान फ़तेह

मैंने पापा का नाम पढ़कर,,,फोन रिसीव कर,,,अपने कान पर लगाया और  और मेरे पापा ने थोड़ा प्यार से कहा

"बेटा,,,,कहां है तू,,,आज तेरा बर्थडे है,,,घर पर सभी याद कर रहे हैं,,,,जल्दी घर आ जाओ,,,, पापा ने कहा

"शुक्र मानो,,,आज मेरा बर्थडे है,,,इसलिए पापा ने आराम से बात की,,,अगर आज,,,मेरा बर्थडे नहीं होता तो मुझे,,,,गलियां जरूर मिलती,,,, क्योंकि मेरे पापा,,,,कहीं भी हो और मैं,,,कहीं पर भी रहूं पर रहता,,,अपने पापा की नजर में हूं,,,मतलब मैं वह टीवी हूं,,,,जिसका रिमोट मेरे पापा के हाथ में है

अब आते हैं,,,हमारे असली मुद्दे पर की सारी दुनिया मतलबी क्यों है"?

तो ठीक है,,,अब आप अच्छे से समझ लीजिए,,,आज मेरा बर्थडे है पर मेरे बर्थडे से आज सबका,,,अपना अपना मतलब जुड़ा हुआ है,,,यह जितने भी मुझे,,,बर्थडे विश कर रहे हैं या मुझे बुला रहे हैं,,,यह सभी अपने-अपने मतलब के लिए,,,मुझे बुला रहे हैं और इनका प्यार एक दिखावा है या मान लीजिए बहाना है,,,,,कैसे"? तो चलिए मेरे साथ,,,मेरे घर,,,,

मैं घर आया और मैंने,,,,,अपनी दादी को आंगन में टेबल पर बैठकर माला जपते हुए देखा,,,दादी के हाथ में माला और जुबान पर राम नाम है पर उनका पूरा ध्यान,,,मेरी तरफ है,,,वह मुझसे कुछ कहना चाहती है पर जब तक,,,माला पूरी नहीं करती, तब तक वह कुछ नहीं कह सकती है,,,मैं,,,,उनके सामने से गुजरा तभी दादी,,,मेरे पीछे से बोली

"अरे,,,,सांड,,,,अब तो सुधर जा,,,आज पूरे 18 साल का हो गया है पर तुझ में चींटी बराबर भी अक्ल नहीं आई,,,,ना तो ठीक से पढ़ाई करता है ना ठीक से घर का काम करता है,,,दिनभर दोस्तों के साथ आवारागर्दी करता फिरता है"! दादी ने चिल्लाते हुए कहा

दादी की बात,,,मुझे बुरी लगी और मैंने तिरछी नजर से दादी को देखा और कहा

"भले में कुछ नहीं करता,,,फिर भी मैं बहुत कुछ करता हूं,,,आपकी तरह दिनभर,,,टेबल पर बैठा नहीं रहता हूं"

मैंने यह कहकर अपनी गर्दन घुमाई और मेरे पापा ने मुझे,,,चांटा मारते हुए कहा

बदतमीज,,,,नालायक,,,,घर के बुजुर्गों से ऐसे बात करते हैं"!

तब मैंने,,,पापा से पूछा क्या

"पापा,,,,क्या घर के बुजुर्ग,,,छोटे बच्चों से ऐसे बात करते हैं,, जैसी दादी,,,मुझसे करती है"!

तो पापा ने मुझे समझाते हुए कहा

"जब कोई,,,घर का बुजुर्ग कुछ कहता है तो उसकी बात पर अमल किया कर,,,वह तेरा भला ही चाहते हैं"!

तब मैंने पापा से पूछा

"पापा,,,क्या हर बात को बुराई करके ही समझाया जाता है,,,उस बात को अच्छे से भी तो समझा सकते हैं"?

तब पापा ने अपनी किस्मत को कोसते हुए कहा

"पता नहीं,,,,किस मनहूस घड़ी में तेरा जनम हुआ था,,, जब से तू,,,,पेदा हुआ है,,,कुछ भी अच्छा नहीं हुआ है"?

तब मैंने पापा से कहा

"अच्छा करोगे तो अच्छा होगा,,,दिनभर घर पर पड़े रहते हो और दादी की पेंशन खाते हो,,,,ओर सबको ज्ञान देते फिरते हो,,,, जिस दिन यह बुढ़िया टपक गई, ,,उसके बाद क्या करोगे"?"ना तो खुद कुछ नया करते हो ओर ना मुझे कुछ करने देते हो"!

तब पापा ने मेरी कालर पकड़ी और मुझे कुत्ते की तरह,,,घसीटते हुए आंगन के बाहर लाए और कहा

"मेरा खाता है और मुझसे जुबान लड़ाता है,,,निकल जा,,,मेरे घर से.. अरे, ,,,गली के आवारा कुत्ते भी अपने लिए दो वक्त की रोटी ढूंढ लेते हैं,,,मेरे सहारे के बिना,,,तेरी वह भी औकात नहीं है,,,देखता हूं,,,कौन देता है,,,,तुझे रोटी"!

तभी मेरे पास, ,,मेरे दोस्त,,,राहुल का फोन आया,,,मैंने फोन उठा कर कान पर लगाया और राहुल बोला

"अरे,,,साले,,,कहां है तू,,,फटाफट रेस्टोरेंट आजा,,,आज तेरे बर्थडे की खुशी में बहुत बड़ी पार्टी रखी है"!

मैंने कहा

"ठीक है,,,मैं आ रहा हूं"!

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